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खून के धब्बे दिखे तो उतरवा दिए लड़कियों के कपड़े

सितवे के छोटे स हवाई अड्डे के करीब 500 मीटर पहले हमें रोक लिया गया और पास के पुलिस स्टेशन में 45 मिनट तक सवालों के जवाब देने पड़े.
साथ में बीबीसी न्यूज म्यांमार के एक सहयोगी थे जिन्होंने यात्रा के पहले दिन ही बता दिया था कि "हमारे पास कोई भी ऐसा वीडियो, कागज़ या इंटरव्यू नहीं मिलना चाहिए जिससे हमें जेल भेज दिया जाए".
हमारी प्रॉड्यूसर ऐन गैलाघर रोज़ सुबह फ़ोन पर हमसे ख़ैर पूछने के अलावा ये भी सुनिश्चित करती थीं कि हर जुटाई गई 'न्यूज़ सामग्री' इंटरनेट के ज़रिए उन तक लंदन या दिल्ली पहुंच जाए.
उसके बाद हम अपने लैपटॉप, मोबाइल फ़ोन और हार्ड ड्राइव से सभी डेटा डिलीट कर देते थे.
जो कुछ बचा के रखते थे उसमें म्यांमार के ख़ूबसूरत पगोडा, नदियां या टूरिस्टों वाली जगहों पर लिए गए सैलानियों के इंटरव्यू होते थे.
हमारी भी जांच हत्याओं के बारे में थी और कोशिश ये पता लगाने की थी कि कुछ दिन पहले बर्मा सरकार ने हिन्दुओं की जिन सामूहिक कब्रों के मिलने का दावा किया था उसका सच क्या था.
यांगोन से रखाइन की तरफ़ जाते समय बीबीसी बर्मीज़ सेवा के लगभग हर सहयोगी ने ख़ास हिदायतें दे रखीं थी.
संयुक्त राष्ट्र या दूसरी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के अफ़सरों ने भी अपने-अपने कर्मचारियों से लो-प्रोफ़ाइल रहने के निर्देश जारी कर दिए थे.
किसी तरह अपना काम पूरा करके हम मांडले और नेपीडॉ होते हुए यांगोन वापस पहुंचे.
यांगोन के औंग क्याव इलाके में 'फ़ादर्स ऑफ़िस' नाम की एक बार में हर शुक्रवार अंतरराष्ट्रीय पत्रकार इकठ्ठा होते हैं.
वा लोन से एक छोटी सी मुलाक़ात फिर हुई. उन्होंने मुस्कुरा कर कहा था "नेक्स्ट टाइम, कम टू बर्मा विद फ़ैमिली. विल बी मोर फ़न".
उसके कुछ हफ़्ते बाद से ही वो अपने सहयोगी के साथ म्यांमार की सबसे ख़तरनाक बताई गई इनसीएन जेल में हैं.पाल पुलिस ने एक ऐसे शख़्स को गिरफ़्तार किया है जिसका दावा है कि उसने अपने साथियों के साथ मिलकर 33 लोगों की हत्या की है. वह ट्रक ड्राइवर और उनके खलासियों को निशाना बनाता था.
पुलिस की गिरफ़्त में वह व्यक्ति हर रोज़ नई बात बता रहा है और उनका मानना है कि यह व्यक्ति आगे भी कई राज़ खोलेगा.
भोपाल पुलिस के मुताबिक़, सरगना आदेश खामरा ने पिछले नौ सालों में ये हत्याएं की हैं. वह हत्या के बाद ट्रक में लदे सामान लूट लेता था.
भोपाल के पुलिस उप-महानिदेशक धर्मेन्द्र चौधरी ने बताया, "आदेश खामरा और उनके गैंग ने अब तक 33 हत्या की बात स्वीकारी है, जिनमें से अधिकांश की पुष्टि हो चुकी है और लगातार हम इसमें खोजबीन कर रहे हैं. पूरे मामले में पांच से छह राज्यों के कनेक्शन हो सकते हैं. हम हर बिंदु पर जांच कर रहे हैं."
पुलिस ने बताया कि ये लोग हाइवे पर ट्रक चालकों से दोस्ती करते थे फिर उन्हें नशे की गोलियां खिलाकर बेहोश कर देते थे. उसके बाद वह चालक और खलासी की हत्या कर ट्रक लेकर भाग जाते थे और उस पर लदे सामानों को बेच देते थे.
धर्मेंद चौधरी ने बताया, "इन लोगों ने मध्य प्रदेश के साथ ही दूसरे राज्यों में भी ट्रक चालकों की हत्या की बात स्वीकारी है. इन्होंने महाराष्ट्र, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में भी कई घटनाओं को अंजाम दिया है."
पिछले महीने की 15 तारीख़ को भोपाल पुलिस को एक लाश मिली थी, जो औबेदुल्लागंज के रहने वाले 25 साल के माखन सिंह की थी. पुलिस हत्यारे को तलाश रही थी.
मृत व्यक्ति भोपाल से लगे इंडस्ट्रीयल क्षेत्र मंडीदीप से लोहे का सरिया लेकर ट्रक से निकला था. ट्रक लावारिस हाल में भोपाल में मिला लेकिन ड्राइवर की हत्या किसने की थी यह पता नहीं लग पाया.
पुलिस ने इस मामले में एक व्यक्ति को गिरफ़्तार किया. उससे पूछताछ की गई तो उसने दूसरे लोगों के नाम बताए. इसके बाद कुछ और गिरफ़्तारियां की गईं और जब उनसे कड़ाई से पूछताछ हुई तो उन्होंने एक के बाद एक कई राज़ उगले. पुलिस ने इस मामलें में नौ लोगों को गिरफ़्तार किया है.
आदेश खामरा को उसके साथियों की निशानदेही पर उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर के जंगलों से भोपाल पुलिस ने पिछले हफ़्ते गिरफ़्तार किया था. वह पेशे से दर्ज़ी हैं. भोपाल से बाहर मंडीदीप इलाक़े के मुख्य मार्केट में उनकी दुकान है.
उनकी तीन बेटियां और एक बेटा है. वह इलाक़े में जाने-माने दर्ज़ी हैं.
लेकिन दिन के वक़्त जिसे मंडीदीप के लोग एक अच्छा दर्ज़ी मानते थे, वह रात के वक़्त एक ख़तरनाक अपराधी बन जाते थे. पुलिस के मुताबिक़, हत्या के मामले 2010 में शुरू हुए थे.
महाराष्ट्र के अमरावती और नासिक में दो घटनाओं में ट्रक चालकों की हत्या हुई थी. इसके बाद मध्य प्रदेश में इस तरह के काफ़ी मामले सामने आये. दूसरे प्रदेशों में भी ऐसी वारदात को वो अंजाम देने लगे.
वह ख़ुद चालकों की हत्या करते थे. इसके पीछे पूरा एक गैंग काम करता था.
लेकिन इस साल जनवरी में उन्होंने यह काम ख़ुद के लिए करना शुरू कर दिया. आदेश का साथी जयकरण भी पुलिस की गिरफ़्त में है जो उनके साथ घटना का अंजाम देता था.
दोनों के निशाने पर 12 से 14 टायर वाले ट्रक होते थे. ये ट्रक उत्तर प्रदेश और बिहार में बिचौलियों की मदद से बेच दिए जाते थे.
पुलिस के मुताबिक़, इस साल की शुरुआत में आदेश की मुलाक़ात जयकरण से हुई थी, जिसके बाद आदेश ने अपना ख़ुद का गैंग बना लिया था. हर हत्या के बाद जयकरण लगभग 30 हज़ार कमाता था.
आदेश इस तरह घटना को अंजाम देता था ताकि यह पता नहीं लगाया जा सके कि कौन इसमें शामिल था. इसी वजह से वो पुलिस से इतने सालों तक बचता रहा.
हर हत्या के बाद वो अपना फोन और सिम बदल लेता था. पुलिस के मुताबिक़, उन्होंने 43 से अधिक फोन और 50 से ज़्यादा सिम इस्तेमाल किए थे.
पुलिस उप-महानिदेशक धर्मेंद चौधरी ने कहा, "इनकी दिमाग़ी हालात पूरी तरह से ठीक है. इन्हें किसी भी तरह से असंतुलित नहीं कह जा सकता है."
आदेश को मालूम था कि ट्रक चालक लंबी दूरी तय करते हैं और आमतौर पर नशे के आदी होते हैं. इसी के चलते वह इन लोगों से दोस्ती कर लेते थे और फिर उनके साथ नशा करते थे.
नशे में आने के बाद वह चालकों को शराब में ख़ास किस्म की नशे की गोली मिला देते थे. इसके बाद वो उनकी हत्या कर देते थे और ट्रक लेकर ग़ायब हो जाते थे.

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