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Showing posts from September, 2018

खून के धब्बे दिखे तो उतरवा दिए लड़कियों के कपड़े

सितवे के छोटे स हवाई अड्डे के करीब 500 मी टर पहले हमें रोक लिया गया और पास के पुलिस स्टेशन में 45 मिनट तक सवालों के जवाब देने पड़े. साथ में बीबीसी न्यूज म्यांमार के एक सहयोगी थे जिन्होंने यात्रा के पहले दिन ही बता दिया था कि "हमारे पास कोई भी ऐसा वीडियो, कागज़ या इंटरव्यू नहीं मिलना चाहिए जिससे हमें जेल भेज दिया जाए". हमारी प्रॉड्यूसर ऐन गैलाघर रोज़ सुबह फ़ोन पर हमसे ख़ैर पूछने के अलावा ये भी सुनिश्चित करती थीं कि हर जुटाई गई 'न्यूज़ सामग्री' इंटरनेट के ज़रिए उन तक लंदन या दिल्ली पहुंच जाए. उसके बाद हम अपने लैपटॉप, मोबाइल फ़ोन और हार्ड ड्राइव से सभी डेटा डिलीट कर देते थे. जो कुछ बचा के रखते थे उसमें म्यांमार के ख़ूबसूरत पगोडा, नदियां या टूरिस्टों वाली जगहों पर लिए गए सैलानियों के इंटरव्यू होते थे. हमारी भी जांच हत्याओं के बारे में थी और को शिश ये पता लगाने की थी कि कुछ दिन पहले बर्मा सरकार ने हिन्दुओं की जिन सामूहिक कब्रों के मिलने का दावा किया था उसका सच क्या था. यांगोन से रखाइन की तरफ़ जाते समय बीबीसी बर्मीज़ सेवा के लगभग हर सहयोगी ने ख़ास हिदायत...

राजस्थान में BJP को झटका, जसवंत सिंह के बेटे थाम सकते हैं कांग्रेस का हाथ

राजस्थान विधानसभा चुनाव की राजनीतिक सरग र्मियां तेज हो ग ई हैं. बीजेपी के संस्थापक सदस्य और अटल सरकार में रक्षामंत्री रहे जसवंत सिंह के बेटे मानवेंद्र सिंह कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं. मानवेंद्र बाड़मेर जिले की शिव विधानसभा सीट से बीजेपी के विधायक हैं. मानवेंद्र सिंह ने अपने करीबी और समर्थकों के साथ कांग्रेस में शामिल होने को लेकर चर्चा करना शुरू कर दिया है. इन दिनों वे बाड़मेर एवं जैसलमेर जिलों के दौरे कर अपने समर्थकों से sex राय मशविरा कर रहे हैं. मानवेंद्र के भविष्य की रा ज नीति का फैसला 22 सितंबर को मानवेंद्र सिंह बाड़मेर के पचपदरा में 22 सितंबर को 'स्वाभिमान रैली' कर रहे हैं. इसमें उनके समर्थक और राजपूत समुदाय के लोग बड़ी तादाद में शामिल हो सकते हैं. ये रैली ही उनके भविष्य की राजनीति राह तय करेगी. मानवेंद्र सिंह ने आजतक से बातचीत में कहा कि मुझे भविष्य की राजनीति कैसे करनी है, यह फैसला 22 सितंबर को पचपदरा में वाली स्वाभिमान रैली में होगा. इस रैली में वे सभी लोग मौजूद रहेंगे, जिन्होंने मेरे पिता के आखिरी चुनाव में साथ दिया था. इसमें मेरे सभी साथी भी मौजूद...

बीजेपी राजनीतिक दल नहीं राजनीतिक आपदा: पीबी सावंत

मराठी में यलगार का मतलब है ''दृढ़ संघर्ष''. वर्तमान बीजेपी स रकार के सत्ता में आने के एक-डेढ़ साल बाद 4 अक्तूबर 2015 को हमने पुणे के शनिवार वाड़ा में एक सभा की थी, जिसका विषय था ''संविधान बचाओ, देश बचाओ''. उसके दो साल बाद 31 दिसंबर, 2017 को उसी जगह पर उसी विषय पर यलगार परिषद का आयोजन किया गया. मैं दोनों ही बार इन सभाओं का आयोजक रहा था. इस बार कबीर कला मंच नाम से एक अन्य संस्था हमसे जुड़ी थी. इस परिषद में बहुत बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए थे, क्योंकि कुछ संस्थाओं के महाराष्ट्र और अन्य राज्यों से समर्थक इसमें शामिल होने आए थे. अगली सुबह उन्हें 200 साल पहले भीमा कोरेगांव में मराठा सेना पर महारों यानी दलितों की जीत पर मनाए जाने वाले उत्सव में शामिल होना था. परिषद को इन लोगों के आने से फ़ायदा हुआ था. इसके अलावा उसी जगह पर महाराष्ट्र स्कूल ऑफ टेक्नोलॉजी का 1 जनवरी 2018 को एक कार्यक्रम होने वाला था और उसने इसके लिए कुर्सियों और अन्य सामान का इंतजाम किया था. उनके ये इंतजाम हमारे काम भी आ गए. ये सभी बातें बताना यहां इसलिए ज़रूरी है, क्योंकि प...